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सुन्दर तूं चेतन्य घन, चिदानंद निज सार

दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर तूं चेतन्य घन, चिदानंद निज सार।देह मलीन असुच्चि जड, बिनसत लगै न बार॥

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