मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

ऐसा भेद बिगूचन भारी

पद · लगभग २ मिनट
ऐसा भेद बिगूचन भारी। बेद कतेब दीन अरु दुनियाँ, कौन पुरिषु कौननारी॥ टेक॥एक बूंद एकै मल मूतर, एक चाँम एक चाँम एक गूदा।एक जोति थैं सब उतपनाँ, कौन बाँम्हन कौन सूदा॥माटी का प्यंड सहजि उतपनाँ, नाद रु ब्यंद समाँनाँ।बिनसि गयाँ थै का नाँव धरिहौ, पढ़ि गुनि हरि भ्रँन जाँना॥रज गुन ब्रह्मा तम गुन संकर, सत गुन हरि है सोई।कहै कबीर एक राँम जपहु रे, हिंदू तुरक न कोई॥57॥

अब कुछ और पढ़ें