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ते हरि आवेहि काँमाँ, जे नहीं आतम रामाँ

पद · लगभग २ मिनट
ते हरि आवेहि काँमाँ, जे नहीं आतम रामाँ॥ टेक॥थोरी भगति बहुत अलंकारा, ऐसे भगता मिलैं अपारा॥भाव न चीन्हैं हरि गोपाला, जानि क अरहट कै गलि माला॥कहै कबीर जिनि गया अभिमाना, सो भगता भगवंत समानाँ॥137॥

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