जाइ पूछौ गोविंद पढ़िया पंडिता, तेराँ कौन गुरु कौन चेला।अपणें रूप कौं आपहिं जाँणें, आपैं रहे अकेला॥ टेक॥बाँझ का पूत बाप बिना जाया, बिन पाऊँ तरबरि चढ़िया।अस बिन पाषर गज बिन गुड़िया, बिन षडै संग्राम जुड़िया॥बीज बिन अंकुर पेड़ बिन तरवर, बिन साषा तरवर फलिया।रूप बिन नारी पुहुप बिन परमल, बिन नीरै सरवर भरिया॥देव बिन देहुरा पत्रा बिन पूजा बिन पाँषाँ भवर बिलंबया।सूरा होइ सु परम पद पावै, कीट पतंग होइ सब जरिया॥दीपक बिन जोति जाति बिन दीपक, हद बिन अनाहद सबद बागा।चेतनाँ होइ सु चेति लीज्यौं, कबीर हरि के अंगि लागा॥158॥

