अंबर कुंजा कुरलियां, गरजि भरे सत्र तालकबीरकविताअंबर कुंजा कुरलियां, गरजि भरे सत्र ताल
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अंबर कुंजा कुरलियां, गरजि भरे सत्र तालकबीरकविता
अंमृत बरिसै हीरा निपजै, घंटा पढ़ै टकसालकबीरकविता
अंषणियां झांई पड़ी,पंथ निहारि निहारिकबीरकविता
अगम अगोघर गमि नहीं,तहाँ जगमगै जोतिकबीरकविता
अग्नि जु लागी नीर मैं, कँदू जलिया भारिकबीरकविता
अनहद बाजै नीझर झरै, उपजै ब्रह्म गियानकबीरकविता
अहिडी दौ लाइया,मृग पुकारे ऱोईकबीरकविता
आइवे कौं जागा नहीं, रहिवे कौं नहीं ठौरकबीरकविता
आकासे मुखि औंधा कुवाँ, पाताले पनिहारिकबीरकविता
आया अण आया भया, जे बहुरता संसारकबीरकविता
आसा एक जु राम की, दूजी आस निरामकबीरकविता
आसा का ईंधण करूॅ, मनसा करूॅ विभूतिकबीरकविता
आसा जीवै जग मरै, लोग मरे मरि जाइकबीरकविता
इक दिन ऐसा होइगा, सब सूँ पड़ै विछोहकबीरकविता
इत प्रधर, उत घर, बण जण आये हाटकबीरकविता
इस तन का दीवा करौ,वाती मेल्यूँ जीवकबीरकविता
इस मन कौ विसमल करौ, दीठा करौं अदीठकबीरकविता
इहि उदार के कारणैं, जग जाच्यौं निस जामकबीरकविता
इहि औसरि चेत्या नहीं, पसु ज्यूं पाली देहकबीरकविता
उतीथै कोइ न आवई, जाकूँ बूॅझौं धाइकबीरकविता
उस संम्रथ का दाश हौं, कदे न होइ अकाजकबीरकविता
ऊजल कपड़ा पहरि करि, पान सुपारी खाँहिकबीरकविता
एक ज दोसत हम किया, जिस गलि लाल कबाइकबीरकविता
ऐसा अद्भुत जिनि क्थौ, अद्भुत राखि लुकाइकबीरकविता
कथणीं कथी तौ क्या मया, जे करणीं नां ठहराइकबीरकविता
कबिर कहता जात हुँ, सुणता है सय कोइकबीरकविता
कबीर अपने जीव तैं, ऐ दोइ वार्तें धोइकबीरकविता
कबीर आपण राम कहि स्पौरां राम कहाईकबीरकविता
कबीर इस संसार का, झूठा माया मोहकबीरकविता
कबीर इस संसार कौं; समझाऊॅ कै बारकबीरकविता
कबीर इस संसार में, घणें मनिष मत हीणकबीरकविता
कबीर एक न जाँणियाँ, तौ बहुजाँण्याँ क्या होइकबीरकविता
कबीर कठिनाई खरी सुमिरतां हरि नामकबीरकविता
कबीर कलि खोटी भई, मुनियर मिलै न कोइकबीरकविता
कबीर कलिजुग आइकर, कीये बहुतज मीतकबीरकविता
कबीर कवल प्रकासिया, ऊग्या निर्मल सूरकबीरकविता