मेरा तुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेराकबीरकवितामेरा तुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा
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मेरा तुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेराकबीरकविता
मेरा मन सुमिरै राम कॅू, मेरा मन रामहिं प्पहिकबीरकविता
मैं जांन्यू पढ़िवौ भलौ, पढ़िया थैं भली जोगकबीरकविता
मैं मैं बड़ी बलाइ है, सकै जो निकसी भाजिकबीरकविता
मैं मैं मेरी जिनि करै,मेरी मूल बिनासकबीरकविता
मैमंता मन मारि रे, घटहीं मांहै घेरिकबीरकविता
मैमंता मन मारि रे, नॉन्हाँ करि करि पीसिकबीरकविता
मोर तोर की जेवड़ी, वलि वन्ध्या संसारकबीरकविता
यंच संगी पिव करै,छठा जुसुमिरै मनकबीरकविता
यह तन काचा कुंभ है, लियां फिरै था साथिकबीरकविता
यह तनु कांचा कुंभ है, चोट चेहूँ दिसि खाइकबीरकविता
यहु ऐसा संसार है, जैसा सैंबल फूलकबीरकविता
यहु तन तौं सब वन भया, करंम भए कुहाड़िकबीरकविता
रज बीरज की कली, तापरि साज्या रूपकबीरकविता
रात्यू रूंनी बिरहिनीं, ज्यूं बंचौ कूं कुंजकबीरकविता
राम नांम जांण्यों नहीं, लागी मोटी पोड़िकबीरकविता
राम नाम कै पटंतरै देबै कौं कुछ नाँहिकबीरकविता
राम नाम जांण्यां नहीं, बात विनंठा मूलकबीरकविता
राम नाम जाण्याँ नहीं, पाल्यो कटक कुटुम्बकबीरकविता
राम रसाइन प्रेम रस, पीवत अधिक रसालकबीरकविता
रामहि थोड़ा जाँणि करि, दुनियाँ आगैं दीनकबीरकविता
रासि पराई राषताँ, खाया घर का खेतकबीरकविता
रैणा दूर विछोहिया, रहु रे संषम झूरिकबीरकविता
वासर सुख नाँ रैन सुख, ना सुख सुपिनै माहिकबीरकविता
विन रखवाले वाहिरा, चिड़ियै खाया खेतकबीरकविता
विरह जलाई मैं जलौ, जलती जलहरि जाउँकबीरकविता
विरहणी थी तौ क्यूँ रही, जली न पिठ के नालिकबीरकविता
विरहा वुरहा जनि कहौ,बिहरा है सुलितानकबीरकविता
संकल ही तै सब लहै, माया इहि संसारकबीरकविता
संसै खाया सक्ल जुग, संसा किनहूँ न खद्धकबीरकविता
सतगुर के सदकै करूँ दिल अपणीं का साछकबीरकविता
सतगुर बपुरा क्या करै, जे सिपही मांहै चूककबीरकविता
सतगुर मिल्यात का भया, जे मनि पाड़ी भोलकबीरकविता
सतगुर साँचा सूरिवाँ, तातैं लोहिं लुहारकबीरकविता
सतगुरु की महिमा अनँत अनँत उपकारकबीरकविता
सतगुरु मारया बाण भरि धरि करिसूधी मूठिकबीरकविता