गोपिन केरे पुंज में, मधुर मुरलिका हाथगिरिधर पुरोहितकवितागोपिन केरे पुंज में, मधुर मुरलिका हाथ
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गिरिधर पुरोहित · चयनित काव्य से इस डिजिटल संकलन में उपलब्ध रचनाएँ। सूची को मूल पुस्तक की संपूर्ण विषय-सूची न मानें।
३८ रचनाएँ

गोपिन केरे पुंज में, मधुर मुरलिका हाथगिरिधर पुरोहितकविता
बोलति हैं तो हि आरति सौंगिरिधर पुरोहितकविता
चित चोंप चितैवे की तैसीये हैगिरिधर पुरोहितकविता
वाल बिहाल भई सुख कीगिरिधर पुरोहितकविता
ऐसी आवत हैं सखि रो जिय मेंगिरिधर पुरोहितकविता
सौंह को सोचु सकोचु न पाँच कोगिरिधर पुरोहितकविता
मेरे तो नांहिंन चंचल लोचनगिरिधर पुरोहितकविता
ते चितयो मन मोहन ओरगिरिधर पुरोहितकविता
जाइके पाँइ परी तब मानगिरिधर पुरोहितकविता
कांननि के रंगे रंग, नैननि कै डोलै संगगिरिधर पुरोहितकविता
केश के समूह नै, कलापी सौं कलह कीन्होंगिरिधर पुरोहितकविता
जेहरी कुनत त्यों ब, कटि हाल हलहतिगिरिधर पुरोहितकविता
कामरस दीपक संवारै जाति फल चारुगिरिधर पुरोहितकविता
जब तैं सिधारे स्याम, तब तैं भुरानो गेहगिरिधर पुरोहितकविता
जासूँ जुरी दीठ अरु, हित की हिलग जांसूगिरिधर पुरोहितकविता
गहकि गहकि घन उठत हैं चहूँ धा तैंगिरिधर पुरोहितकविता
आई वे अचानक सौं, बेटी वृषभान ज्यू कीगिरिधर पुरोहितकविता
पंकज के पत्रनि में, गोपि-गोपि राषित हैगिरिधर पुरोहितकविता
बृच्छनि के कुंजनि में, गुंजनि द्विरेफनि कीगिरिधर पुरोहितकविता
ठौर-ठौर सरसी में, सरोज प्रगट भएगिरिधर पुरोहितकविता
गयो सेज सोइबो, बिलास तेल-फूलनि कोगिरिधर पुरोहितकविता
कौरै आनि झांकति हैं, काहू तें न सांकति हैगिरिधर पुरोहितकविता
रजनी के अंत कंत-मंदिर कै द्वार भईगिरिधर पुरोहितकविता
द्वार रही ठाढ़ी तो, बिसासी’ सासु मो रिसाइगिरिधर पुरोहितकविता
सासू और ननंद जम ऊ तें जोरदारगिरिधर पुरोहितकविता
सषी कौं समूह मोहि त्याजति न एक छिनगिरिधर पुरोहितकविता
बैठी हुँती रोस सौं री, पीले-राते-ताते नैनांगिरिधर पुरोहितकविता
प्रथम मिलाप कुंज-गेह में बिसाषा कियोगिरिधर पुरोहितकविता
नैननि के पैंड़े ह्वै कैगिरिधर पुरोहितकविता
उठी सकारे की, सलोनो मुख देषिबे कौंगिरिधर पुरोहितकविता
बधो है संकेत कुंज-माऊं तहां चलि आईगिरिधर पुरोहितकविता
कहाँही ह्वै निहारत हैं सुअंचल की ओटगिरिधर पुरोहितकविता
तारा उडराय सब, मेघनि लुकाय गयेंगिरिधर पुरोहितकविता
कोमल कपोल निवि ढंकन के अंक देषोगिरिधर पुरोहितकविता
सजनी सयानी पिक-बैनी सुं कहै कहानीगिरिधर पुरोहितकविता
जावकु दिवाइ नख, नूपुर बंधाइ पगगिरिधर पुरोहितकविता