रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोयरैदासकवितारैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय
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५१ रचनाएँ

रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोयरैदासकविता
मस्जिद सों कुछ घिन नहीं, मंदिर सों नहीं पिआररैदासकविता
माथे तिलक हाथ जपमाला, जग ठगने कूं स्वांग बनायारैदासकविता
ऊँचे कुल के कारणै, ब्राह्मन कोय न होयरैदासकविता
जनम जात मत पूछिए, का जात अरू पातरैदासकविता
हिंदू पूजइ देहरा मुसलमान मसीतिरैदासकविता
मुसलमान सों दोस्ती, हिंदुअन सों कर प्रीतरैदासकविता
रैदास इक ही बूंद सो, सब ही भयो वित्थाररैदासकविता
रैदास जीव कूं मारकर कैसों मिलहिं खुदायरैदासकविता
रैदास ब्राह्मण मति पूजिए, जए होवै गुन हीनरैदासकविता
प्रेम पंथ की पालकी, रैदास बैठियो आयरैदासकविता
रैदास हमारौ राम जी, दशरथ करि सुत नाहिंरैदासकविता
पराधीनता पाप है, जान लेहु रे मीतरैदासकविता
जात पांत के फेर मंहि, उरझि रहइ सब लोगरैदासकविता
मंदिर मसजिद दोउ एक हैं इन मंह अंतर नाहिरैदासकविता
ब्राह्मण खतरी बैस सूद रैदास जनम ते नांहिरैदासकविता
जो ख़ुदा पच्छिम बसै तौ पूरब बसत है रामरैदासकविता
सौ बरस लौं जगत मंहि, जीवत रहि करू कामरैदासकविता
रैदास सोई सूरा भला, जो लरै धरम के हेतरैदासकविता
रैदास न पूजइ देहरा, अरु न मसजिद जायरैदासकविता
बेद पढ़ई पंडित बन्यो, गांठ पन्ही तउ चमाररैदासकविता
नीचं नीच कह मारहिं, जानत नाहिं नादानरैदासकविता
अंतर गति राँचै नहीं, बाहरि कथै उजासरैदासकविता
रैदास मदुरा का पीजिए, जो चढ़ै उतरायरैदासकविता
जिह्वा भजै हरि नाम नित, हत्थ करहिं नित कामरैदासकविता
देता रहै हज्जार बरस, मुल्ला चाहे अजानरैदासकविता
रैदास जन्म के कारनै होत न कोए नीचरैदासकविता
धन संचय दुख देत है, धन त्यागे सुख होयरैदासकविता
साधु संगति पूरजी भइ, हौं वस्त लइ निरमोलरैदासकविता
रैदास जन्मे कउ हरस का, मरने कउ का सोकरैदासकविता
जब सभ करि दोए हाथ पग, दोए नैन दोए कानरैदासकविता
सब घट मेरा साइयाँ, जलवा रह्यौ दिखाइरैदासकविता
मुकुर मांह परछांइ ज्यौं, पुहुप मधे ज्यों बासरैदासकविता
राधो क्रिस्न करीम हरि, राम रहीम खुदायरैदासकविता
गुरु ग्यांन दीपक दिया, बाती दइ जलायरैदासकविता
जिह्वा सों ओंकार जप, हत्थन सों कर काररैदासकविता