सूरो सोई साध कहावैतुरसीदास निरंजनीकवितासूरो सोई साध कहावै
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तुरसीदास निरंजनी · चयनित काव्य से इस डिजिटल संकलन में उपलब्ध रचनाएँ। सूची को मूल पुस्तक की संपूर्ण विषय-सूची न मानें।
१६ रचनाएँ

सूरो सोई साध कहावैतुरसीदास निरंजनीकविता
संतौ ऐसा राम हमारातुरसीदास निरंजनीकविता
धनि-धनि पीव की राजधानी होतुरसीदास निरंजनीकविता
आवो री सखी हो मिली गोविंद गावैतुरसीदास निरंजनीकविता
बिचालै नदी बहै जीतुरसीदास निरंजनीकविता
हरि बिन ए दिन जात दुखारेतुरसीदास निरंजनीकविता
रमईया तुम बिन रह्यो न जाइतुरसीदास निरंजनीकविता
जग सूं प्रीति करे जिनि कोइतुरसीदास निरंजनीकविता
मन बनिजारा रे भाईतुरसीदास निरंजनीकविता
बादल बरसन लागै दोइतुरसीदास निरंजनीकविता
भली भई ज्ञान प्रकास भयौतुरसीदास निरंजनीकविता
चलौ जीव हमारातुरसीदास निरंजनीकविता
अब मैं आयो सरन तुम्हारीतुरसीदास निरंजनीकविता
ऐसो ज्ञान बिचारहु रेतुरसीदास निरंजनीकविता
मन मेरो मौन मुद्रा गहौतुरसीदास निरंजनीकविता
द्वै-द्वै दिन के आहि पाहुनेतुरसीदास निरंजनीकविता