प्रेम-रसासव छकि दोऊ, करत बिलास विनोदध्रुवदासकविताप्रेम-रसासव छकि दोऊ, करत बिलास विनोद
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ध्रुवदास · चयनित काव्य से इस डिजिटल संकलन में उपलब्ध रचनाएँ। सूची को मूल पुस्तक की संपूर्ण विषय-सूची न मानें।
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प्रेम-रसासव छकि दोऊ, करत बिलास विनोदध्रुवदासकविता
रसनिधि रसिक किसोरबिबि, सहचरि परम प्रबीनध्रुवदासकविता
कहि न सकत रसना कछुक, प्रेम-स्वाद आनंदध्रुवदासकविता
जिनके जाने जानिए, जुगुलचंद सुकुमारध्रुवदासकविता
जिनके हिय में बसत हैं, राधावल्लभ लालध्रुवदासकविता
कुँवरि छबीली अमित छवि, छिन-छिन औरै औरध्रुवदासकविता
हरिबंस-चरन ‘ध्रुव’ चितवन, होत जु हिय हुल्लासध्रुवदासकविता
बृंदावन रसरीति रहै बिचारत चित्त ‘ध्रुव’ध्रुवदासकविता
प्रेम-तृषा की ताप ‘ध्रुव’, कैसेहुँ कही न जातध्रुवदासकविता
सुख में सुमिरे नाहिं जो, राधावल्लभलालध्रुवदासकविता
जिन नहिं समुझ्यौ प्रेम यह, तिनसों कौन अलापध्रुवदासकविता
या रस सों लाग्यो रहै, निसिदिन जाकौ चित्तध्रुवदासकविता
निसि-बासर मग करतली, लिये काल कर बाहिध्रुवदासकविता
और सकल अघ-मुचन कौ, नाम उपायहिं नीकध्रुवदासकविता
भूलिहुँ मन दीजै नहीं, भक्तन निंदा ओरध्रुवदासकविता
झूलत-झूमत दिन फिरै, घूमत दंपति-रंगध्रुवदासकविता
मन अभिमान न कीजिए, भक्तन सो होइ भूलिध्रुवदासकविता
जिहि तन कों सुर आदि सब, बाँछत है दिन आहिध्रुवदासकविता
हौं तो करि विनती दियो, कंचन काँच बताईध्रुवदासकविता
ब्रजदेवी के प्रेम की, बँधी धुजा अति दूरिध्रुवदासकविता
निंदा भक्तन की करै, सुनत जौन अघ रासिध्रुवदासकविता
दंपति-छबि सों मत्त जे, रहत दिनहिं इक रंगध्रुवदासकविता
सकल बयस सतकर्म में, जो पै बितई होइध्रुवदासकविता
रे मन प्रभुता काल की, करहु जतन है ज्यों नध्रुवदासकविता
दुरलभ मानुष-जनम ह्वै पैयतु केहूँ? भाँतिध्रुवदासकविता
वह रस तो अति अमल है, रहै बिचारत नित्तध्रुवदासकविता
महा मधुर सुकुँवार दोउ, जिनके उर बस आनिध्रुवदासकविता
विषई जल में मीन ज्यों, करत कलोल अजानध्रुवदासकविता
भक्तन देखे अधिक है, आदर कीजै प्रीतिध्रुवदासकविता
ज्यों मृग-मृगियन-जूथ संगफिरत मत्त मन बाँधिरेध्रुवदासकविता
सेवा करतहिं भक्तजन, होइ प्राप्त जो आइध्रुवदासकविता
सेवा अरु तीरथ-भ्रमन, फलतेहि कालहि पाइध्रुवदासकविता
पुरुष सोइ जो पुरिष सम, छाँड़ि भजै संसारध्रुवदासकविता
अटपट रंग को बिरह सुनिध्रुवदासकविता
राधा बल्लभ लाल की प्यारीध्रुवदासकविता
भीजी नवेली चँवेली फुलेल सोंध्रुवदासकविता