माता लै उछंग गोबिंद मुख बार-बार निरखैतुलसीदासकवितामाता लै उछंग गोबिंद मुख बार-बार निरखै
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तुलसीदास · श्रीकृष्ण गीतावली से इस डिजिटल संकलन में उपलब्ध रचनाएँ। सूची को मूल पुस्तक की संपूर्ण विषय-सूची न मानें।
६१ रचनाएँ

माता लै उछंग गोबिंद मुख बार-बार निरखैतुलसीदासकविता
‘छोटी मोटी मीसी रोटी चिकनी चुपरि कै तू दै री, मैया!’तुलसीदासकविता
तोहि स्याम की सपथ जसोदा! आइ देखु गृह मेरेतुलसीदासकविता
मो कहँ झूठेहुँ दोष लगावहिंतुलसीदासकविता
कबहुँ न जात पराए धामहिंतुलसीदासकविता
अब सब साँची कान्ह तिहारीतुलसीदासकविता
महरि तिहारे पायँ परौं, अपनो ब्रज लीजैतुलसीदासकविता
अबहिं उरहनो दै गई, बहुरौ फिरि आईतुलसीदासकविता
अब ब्रज बास महरि किमि कीबो ?तुलसीदासकविता
जानी है ग्वालि परी फिरि फीकेंतुलसीदासकविता
जौलौं हौं कान्ह रहौं गुन गोएतुलसीदासकविता
भूलि न जात हौं काहूके काऊतुलसीदासकविता
छाँड़ों मेरे ललन! ललित लरिकाईतुलसीदासकविता
हरि को ललित बदन निहारु निपट हीं डाँटति निठुर ज्यों लकुट कर तें डारुतुलसीदासकविता
लेत भरि भरि नीर कान्ह कमल नैनतुलसीदासकविता
हाहा री महरि! बारो, कहा रिसबस भईतुलसीदासकविता
ललित लालन निहारि, महरि मन बिचारितुलसीदासकविता
ब्रज पर घन घमंड करि आएतुलसीदासकविता
टेरीं कान्ह गोबर्धन चढ़ि गैयातुलसीदासकविता
गावत गोपाल लाल नीकें राग नट हैंतुलसीदासकविता
देखु सखी हरि बदन इंदु परतुलसीदासकविता
आजु उनीदे आए मुरारीतुलसीदासकविता
गोपाल गोकुल बल्लवी प्रिय गोप गोसुत बल्लभंतुलसीदासकविता
बिछुरत श्रीब्रजराज आजु इन नयनन की परतीति गईतुलसीदासकविता
नहिं कछु दोष स्याम को माई!तुलसीदासकविता
करि है हरि बालक की सी केलितुलसीदासकविता
आलि! अब कहुँ जनि नेह निहारितुलसीदासकविता
लागियै रहति नयननि आगे तें न टरति मोहन मूरतितुलसीदासकविता
जब ते ब्रज तजि गये कन्हाईतुलसीदासकविता
ससि तें सीतल मोकौं लागै माई री! तरनितुलसीदासकविता
संतत दुखद सखी! रजनीकरतुलसीदासकविता
कोउ सखि नई बात सुनि आईतुलसीदासकविता
ऊधो! या ब्रज की दसा बिचारौतुलसीदासकविता
मधुकर! कहहु कहन जो पारौतुलसीदासकविता
ऊधो जू कह्यो तिहारोइ कीबोतुलसीदासकविता
सो कहौ मधुप! जे मोहन कहि पठईतुलसीदासकविता