अंजन दीन्हे किरकिरी, सुरमा दियो न जायरहीमकविताअंजन दीन्हे किरकिरी, सुरमा दियो न जाय
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अंजन दीन्हे किरकिरी, सुरमा दियो न जायरहीमकविता
अंडन बौड़ रहीम कहि, देखि सचिक्कन पानरहीमकविता
अधम बचन तैं को फल्यो, बैठि तार की छाहिंरहीमकविता
अनुचित बचन न मानिए, यदपि गुराइस गाढ़िरहीमकविता
अनुचित-उचित रहीम लघु, करहिं बड़ेन के जोररहीमकविता
अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ कामरहीमकविता
अमर बेलि बिन मूल की, प्रति-पालत है ताहिरहीमकविता
अमी पियावत मान बिन, रहिमन मोहिं न सुहाइरहीमकविता
अमृत ऐसे बचन में, रहिमन रिस की गाँसरहीमकविता
अरज-गरज मानैं नहीं, रहिमन ये जन चारिरहीमकविता
असमय परे रहीम कहि, माँगिजात तजि लाजरहीमकविता
आए राम रहीम सब, किए मुनिन को भेषरहीमकविता
आप न काहू काम के, डार पात फल मूररहीमकविता
आवत काम रहीम है, गाढ़े बन्धु सनेहरहीमकविता
उरग तुरँग नारी नृपति, नीच जाति हथियाररहीमकविता
ऊगत जाही भाँति सों, अथवत ताही काँतिरहीमकविता
ओछे काम बड़े करैं, तौ न बड़ाई होइरहीमकविता
कदली सीप भुजंग मुख, स्वाति एक गुन तीनरहीमकविता
कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोयरहीमकविता
कमला थिर न रहीम कहि, लखत अधम जे कोयरहीमकविता
करत निपुनई गुन बिना, रहिमन गुनी हजूररहीमकविता
करम-हीन रहिमन लखौ, धँसो बड़े घर चोररहीमकविता
कहि रहीम इक दीपतैं, प्रगट सबै द्युति होइरहीमकविता
कहि रहीम धन बढ़ि घटै, जात धनिन की बातरहीमकविता
कहि रहीम या जगत में, प्रीति गई है टेरिरहीमकविता
कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहु रीतिरहीमकविता
कहु रहीम उत जायकै, गिरिधारी सों टेरिरहीमकविता
कहु रहीम केतिक रही, केती गई बिहाइरहीमकविता
कहु रहीम कैसे बनै, अनहोनी ह्वै जाइरहीमकविता
कहु रहीम कैसे बनै, बेर-केर को संगरहीमकविता
कागद को-सो पूतरा, सहजहिं में घुलि जायरहीमकविता
काज परे कछु और है, काज सरे कछु औररहीमकविता
काम कछू आवै नहीं, मोल रहीम न लेइरहीमकविता
काह करब बैकुंठ लै, कलपबृच्छ की छाँहरहीमकविता
काह कामरी पामरी, जाड़ु गए ते काजरहीमकविता
कुटिलन संग रहीम कहि, साधू बचते नाहिंरहीमकविता